एक औरत का संघर्ष

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Parivarik kahani in hindi

एक परिवार गांव में रहते थे। पति, पत्नी, दो बच्चे और अतिरिक्त रिश्तेदार। सब खुशहाल जीवन जी रहे थे। एक दिन रिश्तेदारों में से एक रिश्तेदार ने जमीन – जायदाद के लिए पति की गोलियों से मार कर हत्या कर दी। वो लोग उस पुरे परिवार की हत्या करना चाहते थे। लेकिन जब तक वो लोग घर वापस आकर उन्हें मारते।तब तक किसी ने आकर उसकी पत्नी को सब बता देते हैं। और वो औरत अपने बच्चों को लेकर मायके भाग जाती है। अब मायके से औरत के भाई ने कुछ लोगों को इकट्ठा कर अपनी बहन के ससुराल में जाते है। और वहां जमीन – जायदाद को लेकर जो भी उलझन थी। उसे सुलझाने के बाद सब का बंटवारा करवा के अपने भांजे के नाम करवा देते हैं।


कुछ दिन तो सब कुछ ठीक – ठाक रहा। लेकिन कुछ ही दिनों बाद भाभियों के ताना – कसी चालु हो गई।   वो औरत अपने भाई और पिता से हैं।
औरत – अब मैं कब – तक यहां रहुंगी।
भाई – अब – तक का क्या मतलब ये घर जितना हमलोगो का है। उतना ही तुम्हारा भी तो है।
औरत – वो सब ठीक है। लेकिन मैं अपने पैरों पे खड़ा होना चाहती हुं।
भाई – मगर उसकी क्या जरूरत है। किसी ने कुछ कहा है क्या।
औरत – नहीं – नहीं भाई ऐसी कोई बात नहीं है। यहां किसी चीज की कोई कमी नहीं है।
भाई – फिर यहां से जाने की बात क्यों कर रही हो।
औरत – मैं तो बस इतना चाहती हुं। की अपनी पढ़ाई लिखाई को अपने काम ले आऊं। बेकार बैठने से अच्छा होगा कि कुछ करुं।
भाई – ठीक है जैसा तुम्हे सही लगे।क्या करना चाहती हो।
औरत – स्कूल खोलना चाहती हुं।
भाई – ठीक है।

पास के शहर में ही एक किराए के मकान में स्कूल खुला। वहां बच्चों के लिए हर सुविधा का इंतजाम किया गया। और उसी में वो औरत और उसके बच्चे रहने लगें।।
अब एक अकेली औरत के लिए स्कूल की देखभाल इतना आसान तो नहीं। और भाईयों के लिए गांव की खेती बाड़ी छोड़ कर यहां रहना आसान नहीं-नहीं । अब भाई के बच्चें भी अभी छोटे-छोटे ही है। क्या किया जाए , किसे कहा जाए। कुछ समझ नहीं आ रहा था कि तभी एक दुर का रिश्तेदार कुछ काम और किराए का घर ढुंढता हुआ उसी औरत के पास आता है। अब ऐसे समय में उस औरत को और क्या चाहिए था। वो जिस मकान में रह रही थी वहीं रुकने के लिए कहा। और किराया और बच्चों की पढ़ाई फ्री कर दी। और स्कूल में ही उस आदमी और उसकी पत्नी को काम दे दिया।


सब ठीक – ठाक चल रहा था। बच्चें अब धीरे – धीरे बरे हो रहे हैं। अपने और पराए का फर्क तो दिख ही जाता है। अपनी बेटी को काम करने से मना करना और उस किरदार की बेटी से हांस्टेल के बच्चों के लिए खाना बनाना। सभी को खाना खिलाना । और भी बहुत सारे काम। अगर कोई कुछ बोलने की कोशिश करे तो एहसान के तले दबाव। आखिर कोई करे भी क्या।‌‌ अपने बेटे को बरे शहर में पढ़ाई के लिए भेज देती है। और यहां किरदार और उसके बेटे से स्कूल और घर के काम तो हो ही जाते हैं।किराएदार तो सब चुपचाप सह रहे हैं लेकिन उनके बेटे वो आवाज उठाने लगते हैं। और अपने पिता पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं।अलग हो जाने की मांग करते हैं।

इसी बीच उस औरत के बेटे को नौकरी मिल जाती है और बेटी की एक अच्छे घर में शादी ठीक हो जाती है। बेटी की शादी धूमधाम से होती है और वो अपने ससुराल चली जाती हैं। बेटा अपनी कमाई से कुछ जमीन खरीद कर। उसमें एक अच्छा सा घर बनाता है। तब तक वो किराएदार भी अपने बचाए हुए पैसों से थोङी सी जमीन खरीद लेता है। और उसका बेटा एक कंपनी में ही काम करने लगता है। और पैसे जुटाकर घर बना लेता है। और वो लोग अपने घर में चले जाते हैं।

अब स्कूल की देखभाल ठीक से नहीं हो पाने की वजह से बच्चें वो स्कूल छोड़ कर दुसरे स्कूल में जाने लगें। तो बेटे ने मां को स्कूल बंद कर देने को कहा। और अपनी मां को अब आराम करने को कहा। मां ने बेटे की बात मान ली। कुछ दिन बाद बेटे की शादी की बात चलने लगी। बहुत सारे रिश्ते आए। उनमें से ही एक रिश्ता जिसमें सबसे ज्यादा दहेज और खुबसूरत लरकी भी थी। उसे चुना गया। धूमधाम से शादी हुई। पूरे शहर में खुब बराई हुई। सूरु में तो सब ठीक ठाक रहा। लेकिन धिरे धिरे सास बहू में झगरे और कहा सुनी सुरु हो गया। बीच में बेटा पीस रहा था। अब वो करे तो क्या। मां जिसने अकेले दुनिया से लर के पाल – पोस के कुछ करने लायक बनाया। और पत्नी जो अपना सब कुछ छोड़कर आती है। अब वो किसकी साईड ले। कुछ दिनों के लिए पत्नी को अपने साथ लेकर चला जाता है। और मां की देखभाल के लिए एक दाई लगा देता है। कुछ दिन बाद पत्नी प्रेगनेंट हो जाती है। और वो फिर घर वापस आ जाती है।सब बहुत खुश हो जाते हैं।नौ महीने बाद बेटे का जन्म होता है। और अब सभी प्यार से रहने लगते है।

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